Monday, March 7, 2011

BHRASHTACHAAR

भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन उचित है
बाबा रामदेव द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ा गया अभियान वाकई काबिले तारीफ है. आज हमारे देश में सरकारी तंत्र के अलावा प्राइवेट सेक्टर भी भ्रष्टाचार से लिप्त है ऐसे माहोल में बाबा रामदेव का अभियान एक क्रांति की पहल के समान है. हमारे देश के सभी नागरिकों को इस आन्दोलन का समर्थन करना चाहिए जिससे की विदेशों में जमा काला धन हमारे देश में वापस आ सके और देश की तरक्की में उसका उपयोग हो सके. केंद्र सरकार के कुछ राजनेताओं द्वारा किया जा रहा आन्दोलन का विरोध और टिप्पणियां सरकार की छवि पर एक प्रश्नवाचक चिन्ह लगाने जैसा है. अगर इस ..आन्दोलन के द्वारा भ्रष्टाचार का नियंत्रण करने में हम थोड़े भी कामयाब हो गए तो यह भारत के लिए एक उपलब्धि होगी. देखना सिर्फ इतना है की इस आन्दोलन में कोई सियासत न हो और कोशिश ईमानदार हो.

Sunday, February 20, 2011

BHARTIYA SAMAJ ME STRIYON KA YOGDAN

भारतीय समाज में स्त्रियों का योगदान .................................
इतिहास से लेकर आज के आधुनिक युग तक अगर नज़र डालें तो भारतीय समाज में स्त्रियों का योगदान पुरुषों के मुकाबले कम नहीं है बदलते समय के साथ साथ स्त्रियों ने भी पुरुषों के सामान ही हर छेत्र में तरक्की की है जिस पर कभी पुरुषों का वर्चस्व हुआ करता था जैसे राजनीति, प्रशासनिक सेवाएँ , कार्पोरेट, खेल इत्यादि सभी छेत्रों में स्त्रियों के अच्छी कार्य क्षमता एवं बुद्धिमत्ता के प्रदर्शन को नकारा नहीं जा सकता.
लेकिन आज भी हमारे समाज में स्त्रियाँ असुरक्षित महसूस करती हैं उन्हें अत्याचार एवं शोषण का शिकार होना पड़ता है वैसे तो सरकार ने महिला योग जैसे संस्थानों का निर्माण कर रखा है  पर सभी के लिए उसका लाभ उठा पाना संभव नहीं हो पाता क्यों की महिलाओं के लिये बने कानून एवं अधिकारों की जानकारी का आभाव भी इसका एक मुख्य कारण है. सरकार को चाहिए के वे महिलाओं को अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध बने कानून एवं अधिकारों से अवगत कराए जिससे की अधिक से अधिक महिलाएं इसका लाभ उठा सकें और अत्याचार के खिलाफ लड़ सके.
इसके अलावा भारतीय समाज में पुरुष महिलाओं के प्रति अपनी सोच में बदलाव लायें ताकि किसी भी महिला को पुरुष प्रधान समाज एवं संस्थान में कार्य करने में असुविधा महसूस न हो.
आज के समाज में अगर हम महिलाओं के योगदान एवं तरक्की की बात करें तो इसका जीता जागता उदाहरण हमारे सामने है एक दिहाड़ी मजदूर की लड़की ने सरकारी स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर एयर इंडिया में एयर होस्टेस की नौकरी प्राप्त करी. ये हमारे समाज के लिए गर्व की बात है.

Thursday, February 3, 2011

VALENTINE DAY.......................

प्यार को प्यार ही रहने दो ............................................................
१४ फरवरी .....विश्व प्रेमी प्रेमिका  दिवस के रूप में मनाया जाता है ........ वैसे तो इस ढाई अक्षर के शब्द के कई रूप हैं पर आज के दिन पता नहीं इस शब्द में कौन से पंख लग जाते हैं ...........जो टूटे हुए छत्ते से मधु मक्खी की तरह उड़ने लगता है ........युवा वर्ग में एक विशेष उत्साह दिखाई देता है.......गिफ्ट शोप्स,फ्लावरशोप्स  और ग्रीटिंग कार्ड शोप्स को दुल्हन की तरह सजाया जाता है........शहर की होटलों में विशेष पार्टियाँ आयोजित की जाती हैं....ऐसा लगता है जैसे की सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्यार के इज़हार की तारीख मुक़र्रर की गई हो अगर आज इज़हार ना किया तो फिर अगली १४ तारीख दे दी जाए.
शिक्षण संस्थाओं में उत्सव का माहोल होता है ..........सड़कों पर युवाओं का उत्साह और उमंग देखने लायक नज़ारा होता है ..................ऐसा लगता है जैसे लैला - मजनू , हीर - राँझा, शिरी - फरहाद, रोमिओ  - जुलिअट सभी जन्नत से उतर कर सड़कों पर आ गए हों .................. और सिलसिला शुरू होता है प्यार के इज़हार का गुलाब के फूल, ग्रीटिंग कार्ड्स, गिफ्ट्स ................... इत्यादि के आदान प्रदान से  जिसका प्यार कबूल हो जाता है वह अपने आप को धरती का सबसे खुश नसीब इंसान समझने लगता  है और जिनके दिल टूटते हैं वो एक दो जगह और कोशिश कर के फिर इंतज़ार करते हैं...... अगली १४ फरवरी का इस ख्याल को ज़हन में रखते हुए की ." वो सुबह कभी तो आएगी ".......................
शाम होते होते जिनके दिल मिल जाते हैं वे होटल्स, रेस्टोरेंट्स,गार्डन्स और डी.जे पार्टियों में अपनी शाम बिता लेते हैं...... और टूटे हुए दिल अपना गम गलत कर लेते हैं ..
ऐसा नहीं है की आज का दिन शांतिपूर्ण तरीके से बीत जाता है कई राजनैतिक दल जो इसका विरोध करते हैं वे होटलों, दुकानों में तोड़ फोड़ गार्ड़न्स में युगल जोड़ों के साथ मार पीट और सड़कों पर हुडदंग जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं........ ..और ऐवें ही शहर का माहोल बिगड़ जाता है ...उनके अनुसार यह हमारी संस्कृति का अपमान है ...उनका विचार सही है पर तरीका गलत है ........दहशत फैलाना किसी समस्या का समाधान नहीं है ..और ना ही किसी संस्कृति का हिस्सा .......
.... सवाल यह नहीं है की वेलेंटाइन डे मनाना गलत है सवाल यह है की क्या जो तरीका हमने अपना रखा है  वह किस हद तक सही है ..
प्यार सिर्फ एक शब्द नहीं है ये एहसास है रिश्तों का इसका इस तरीके से मज़ाक बना कर सड़कों पर इज़हार करना  इस शब्द और रिश्ते की गरिमा को ठेस पहुँचाने जैसा है.... इसे सौम्यता और शालीनता के साथ भी मनाया जा सकता है और कभी भी इज़हार किया जा सकता है प्यार किसी तारीख का मोहताज नहीं है.......... और भी दिवस हम मनाते हैं पाश्चात्य संस्कृति द्वारा दिए हुए जैसे मदर्स डे , फादर्स डे उस दिन युवाओं का उत्साह कहाँ चला जाता है माता पिता के प्रति आस्था और श्रद्धा व्यक्त  करने का ...................... इतना उत्साह परंपरागत त्योहारों मै क्यों  नहीं दिखाई देता ..  सोचना हमे है की प्यार को प्यार ही रहने देना है या उसका तमाशा बनाना है....

J
AIDEEP R.BHAGWAT


19- SUN CITY, MR- 2
MAHALAXMI NAGAR, INDORE (M.P)
08223907282,08370004121
EMAIL.... jrbhagwat@gmail.com, jaideeprbhagwat@rediffmail.com

REPUBLIC DAY...................................

ज़रा सोचिये ...................................................................................


२६ जनवरी हमारे देश में पिछले ६० वर्षों से गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता आ रहा है .. आज के दिन हमारे देश का संविधान बना था ..
लेकिन अब ऐसा लगता है जैसे यह सिर्फ एक "नेशनल होलीडे" बनकर रह गया है . आज तक न तो इसका रूप बदला है न ही किसी ने बदलने का प्रयास किया..दिल्ली के लाल किले में झंडा फहराना, परेड, राष्ट्रपति का भाषण, झांकियां, शहीदों और वीरों का सम्मान ये औपचारिकतायें अत्यधिक् ज़रूरी हैं इनका आदर..... करना हर देशवासी का कर्त्तव्य है.लेकिन इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों एवं शहरों में जो कार्यक्रम....होते हैं अगर हम उन पर नज़र डालें तो चिराग तले अँधेरा ही नज़र आता है..

सरकारी संस्थाओं में झंडा वंदन की औपचारिकता के बाद छोटा मोटा भाषण और लोग अपने घर चले जाते हैं यही आलम निजी संस्थानों का भी होता है.. शिक्षण संस्थानों में औपचारिकताओं के बाद किसी नेता या मंत्री का भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और उसके बाद बच्चे लड्डू लेकर घर लौट आते हैं.......राजनैतिक दल जगह- जगह लाउड स्पीकर्स लगाकर देशभक्ति के गीत बजाते हैं..... सारी देश भक्ति आज ही के दिन दिखाई देती है... ये देश भक्ति होती है या शक्ति प्रदर्शन समझ पाना मुश्किल है.. कुछ नेता- मंत्री महापुरुषों के पुतलों पर हार फूल चढ़ाकर सम्मान व्यक्त...... करतें हैं या सम्मानित महसूस करते हैं..

अब अगर आम जनता की बात करें तो उनके लिए यह एक छुट्टी से ज्यादा कुछ भी नहीं है .. ऐसे में कभी २६ जनवरी शनिवार या सोमवार को आ जाये तो सोने पे सुहागा ........ आज की पीढ़ी की भाषा में कहें तो वीकेंड अच्छा मनेगा.... पिकनिक स्थलों पर पैर रखने की भी जगह नहीं होती............ इस दिन कुछ तथा कथित लोगों का गला सूखता ही नहीं ..... बल्कि ड्राय डे की हड्डी भी गले में अटकी पड़ी रहती है...... कुल मिलाकर गणतंत्र दिवस का एहसास कम और छुट्टी का आलस ज्यादा होता है ........लोग अपने बच्चों के लिए सड़कों पर बिकने वाले झंडे खरीदते हैं...जो दुसरे दिन सड़कों पर इधर उधर उड़ते नज़र आते हैं.. इतने झंडे तो इमारतों और कार्यालयों में नहीं फहराए जाते जितने की दुसरे दिन सड़कों पर बेशर्मी से रौंदे जाते हैं इससे बड़ा तिरंगे का अपमान और क्या होगा....

हम कब तक इसी तरह गणतंत्र दिवस मनाते रहेंगे ........... जिन शहीदों और महापुरुषों की कुर्बानियों से हम इस आज़ाद वतन में सांस ले रहे हैं क्या यही तरीका है उन्हें याद करने का..... क्या टेलिविज़न चैनलों पर एक दिन देश भक्ति की फिल्म देख लेने से हम देश भक्त हो हो जाते हैं.... क्या एक मरणोपरांत मैडल द्वारा सम्मान ही उनकी शहादत का पुरस्कार है......... भगत सिंग, चन्द्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु और उनके जैसे कई शहीदों के नाम आज गुमनामी के अंधेरो में गुम होते जा रहे हैं........... क्यों २६.११ में शहीद हुए एक जवान के पिता ने मुख्यमंत्री को अपशब्द कहकर घर से निकाल दिया..................... क्यों आज का अधिकांश युवा वर्ग डिफेन्स सर्विसेस में नहीं जाना चाहता..................... क्यों हम भूलते जा रहे हैं उन लोगों के योगदान को जो हमारे देश के आधारस्तंभ हैं........ यह एक गहन चिंतन का विषय है........................................................................................क्यों न हम इस २६ जनवरी से कुछ ऐसा करें...... शहीदों और उनके परिवार के लिए की उनके परिवार भी हम देशवासियों पर गर्व करें और .... अमर शहीदों की आत्माएं भी गर्व से कहें .................
कर चले हम फ़िदा जानोतन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों..................... ज़रा सोचिये ............


J
AIDEEP R.BHAGWAT

ASST.ZONAL SALES MANAGER
AUTOCOP INDIA PVT.LTD, M- 47, NEW SIYAGANJ, PATTHAR GODAM ROAD, INDORE. M.P 07314224095.

19- SUN CITY, MR- 2
MAHALAXMI NAGAR, INDORE (M.P)
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EMAIL.... jrbhagwat@gmail.com, jaideeprbhagwat@rediffmail.com

Sunday, January 23, 2011

MAHANGAI DAAYAN............................................................

महंगाई डायन.................................
बढती हुई महंगाई ने भले ही देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूती प्रदान करी हो लेकिन इसकी रफ़्तार से आम जनता ही नहीं बल्कि सभी वर्ग पर प्रभाव पड़ा है.. बढती महंगाई ने आम जनता की आर्थिक स्थिति को डगमगा दिया है.. इसके बढ़ने का मुख्य कारण बढती हुई जनसँख्या,उत्पादन कम और उपभोक्ता अधिक, सरकार की नीतियाँ इत्यादि हैं.
केंद्र सरकार को चाहिए की अपनी नीतियों पर पुनःविचार करें....... और एक विशेष समिति गठित कर आयात एवं निर्यात की वस्तुओं का अवलोकन करें जिससे की यह निर्धारण हो सके कि हमारे देश की खपत के अनुसार कितना आयात करना है और कितना निर्यात किया जा सकता है.... उद्देश्य यह न हो कि अधिक कीमत मिलने कि वजह से हमारे देश में होने वाली खपत को नज़रंदाज़ कर निर्यात कर दिया जाये........... गरीबी रेखा के नीचे के वर्ग के लिए
कंट्रोल कि दुकानों पर होने वाले भ्रष्टाचार को रोककर उन्हें उचित मूल्य पर अनाज एवं रोज़मर्रा कि वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाएँ........... सरकार को चाहिए कि उत्पादन का एक लक्ष्य निधारित करे और इसकी जानकारी हर भारतीय नागरिक तक पहुंचे......... किसानो के लिए विशेष योजनायें बनाकर अनाज के उत्पादन को बढ़ने का प्रयास किया जाये..
गैर सरकारी तरीकों पर अगर गौर करें तो देश कि बड़ी कंपनियों को चाहिए कि.... उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं कि गुणवत्ता सुधार कर उचित मूल्य पर बाज़ार में बेचें और सरकार से अनुरोध कर सेल्स टैक्स और एक्साईज ड्यूटी में छूट कि अपील करें.......... जिससे कि हमारी निर्भरता आयातित वस्तुओं पर कम हो सके जो कि हमे ऊँचे दामो पर आयातित करनी पड़ती हैं.... आम जनता अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं का निर्धारण करे और फिजूलखर्ची में लगने
वाले धन को बचत में परिवर्तित कर रोज़मर्रा कि वस्तुओं के संग्रहण में उपयोग में लायें..........पेट्रोल कि कीमतों में वृद्धि ने भी आम जनता के बजट को अस्त व्यस्त कर दिया है... फिर भी वाहनों के उपयोग एवं बिक्री पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है.............. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग भी बचत का एक उपाय है क्योंकि आम जनता कि आमदनी उस रफ़्तार से नहीं बढ़ रही है जिस रफ़्तार से महंगाई...
कहीं ऐसा न हो यह गीत ज़िन्दगी भर हमे गाना पड़े.......... सखी सैय्याँ तो खूब ही कमात है... महंगाई डायन खाए जात है....


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JAIDEEP R.BHAGWAT

ASST.ZONAL SALES MANAGER
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Thursday, January 6, 2011

HELMET

हेलमेट की अनिवार्यता ......................................................
हेलमेट की अनिवार्यता के लिए प्रशासन द्वारा जो प्रयास किये जा रहे हैं वे प्रशंसनीय हैं ..यह हमारी सुरक्षा के लिए है और इसका  उपयोग हर दो पहिया चालक की अनमोल ज़िन्दगी के लिए अत्यधिक ज़रूरी है .. जैसे हम घर से निकलते वक्त रुमाल,पर्स और घडी रखना नहीं भूलते उसी प्रकार हेलमेट को भी अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना लें..आज ज़रूर यह बोझ लग रहा है पर सड़क दुर्घटना में जान गवाने या अपाहिज होकर ज़िन्दगी भर परिवार पर बोझ बनने से ये बोझ ज्यादा बेहतर है....प्रशासन को चाहिए की कुछ समय बाद इस नियम का और सख्ती से पालन करवाएं ..अगर यह मुहीम कुछ समय चलकर ठंडी पड गयी तो प्रशासन जाने अनजाने में उन कई हेलमेट बनाने वाली कंपनियों का भला कर देगा जिनके हेलमेट बरसों से गोदाम में पड़े धूल खा रहे है...............
 

LEKHAK

मै लेखक नहीं था ...............................................
एक सुबह घर के सामने एक हादसे ने मेरी अंतरात्मा को झकझोर दिया और उसके बाद जो विचार मन में आये कागज़ पर लिखता चला गया .........इस तरह  शुरू हुआ लिखने का सिलसिला हर आने वाले विचार को कागज़ पर उतारते उतारते एक विचार ने आर्टिकल  का रूप ले लिया और प्रकाशित हुआ "नई  दुनिया " अखबार में २९.११.२०१० को  शायद मेरे जीवन की सबसे खुशनुमा सुबह थी ...धन्यवाद देता हूँ "नई दुनिया " का जिसने मुझे अवसर दिया अपने विचारों को व्यक्त करने का, कई लोगों के फ़ोन आये बधाइयों के साथ कई लोगों ने पुछा क्या यह तुमने ही लिखा है ?....भरोसा नहीं था किसी को शायद की मै भी लिख सकता हूँ .........लोगों की गलती नहीं है मुझे जिस रूप में लोग जानते हैं शायद मै ये नहीं था .............
विचार हर व्यति के मन में आते हैं पर कई लोग उसे व्यक्त कर पाते हैं कई उसे नहीं .............मेरे पास लेखन की कोई डिग्री नहीं है .............पर एक बात सभी से कहना चाहूँगा मन में आने वाले विचारों को ना रोकें उन्हें समेट ले कागजों में  क्या पता कल वो आर्टिकल की शक्ल लेकर किसी को सोचने पर मजबूर कर दे या किसी की  सोच में परिवर्तन ले आये...